कवीश्वर चन्दा झा'क अनुसार मिथिला'क नक्सा | Mithila Map by Chanda Jha
कवीश्वर चन्दा झा'क अनुसार मिथिला'क नक्सा ; एकर चौहद्दी उ.नेपाल दक्षिण -गंगानदी(बेगूसराय);पूर्व-महानन्दा नदी(कटिहार;पूर्णिया आदि);पश्चिम-गंडक(मुजफ्फरपुर-मोतिहारी)
कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद।
कवीश्वर चन्दा झाक व्यक्तित्व बहुआयामी ओ पारदर्शक छल । ई गीतकारक संग महाकवि छलाह। संगीत शास्त्रक मर्मज्ञ आ तत्ववेता छलाह । जकर विराट प्रदर्शन हिनक प्रवंध-मुक्त काव्यमे देखल जाइत अछि । ई अनुवादक रुपमे सुविख्यात आ गद्यक प्रवर्तक छलाह । पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यक अनुवाद साहित्येतिहासक एक ऐतिहासिक उपलब्धि थिक । कवि चन्द्र व्यक्तित्वमे गीतकार ओ प्रवंधकारक अद्भूत संयोग अछि । संपादनक रुपमे साहेब रामदासक गीतावलीक कुशल संपादन कएलनि । एकर अतिरिक्त चंदा झा सुमधुर गायक , महान समाजसेवी , समर्पित साधक आ एकनिष्ठ भक्त छलाह । एक दिस भक्तिमूलक पद लिखलनि तँ दोसर दिस समाज , सत्ता , शासन ओ व्यवस्थामे व्याप्त गरीबी , अभाव , भूख , कुशासन , भ्रष्टाचार , शोसन-दोहनक नग्न चित्रण अपन कविताक माध्यम सँ कएलनि । मिथिलाक प्राचीन इतिहासक सेहो अन्वेषण कएलनि । मिथिलाक प्राचीन इतिहास , पुरान मंदिर , तीर्थ , जलाशय , डीह-डाबर सभक पुरुद्धानक श्रेय हिनके छनि ।
कविश्वर चंदा झाक रचना संसार
1 वाताह्न , 1889 मे प्रकाशित ।
2 लक्ष्मीश्वर निवास , 1888मे
3 मिथिला भाषा रामायण , 1892मे
4 गीत शप्तशती , 1902मे
5 संगीत सुधा , 1902मे
हिनक मृत्युपरान्त प्रकाशित संकलन -
1 महेशवाणी , 1920मे
2 चन्द्रपदावली , 1931मे
3 चन्द्ररचनावली , 1981मे
हिनका द्वारा अनुवादित पोथी
1 विद्यापतिक संस्कृतक पोथी "पुरुष-परीक्षा" 1888मे
हिनक द्वारा संपादित पोथी
1 संतकवि साहेव रामदासक गीतावली , 1901मे
एकर अतिरिक्त कतेको पोथीक रचना ओ प्राचीन कविक हरायल रचना सभक खोज कए संकलित
कएलनि ।
कविश्वर चन्दा झा कृत "मिथिला भाषा रामायण" मे कविश्वरक
मिथिला प्रेम - कवीश्वर चन्दा झाक
"मिथिला भाषा रामायण" सँ स्पष्ट होइत
अछि जे हुनका अपन मातृभूमि मिथिलाक
प्रति अगाध प्रेम छलनि । इएह हेतु भेल जे
मिथिलांचलक गाछ-वृक्ष , पोखरि-झाँकरि , पशु-
पक्षी सभ रामायणमे स्थान पाबि अमर भए गेल
अछि । वस्तुतः कवीश्वरकेँ जतए कतहुँ अवसर
भेटलनि ओ मिथिलाक प्राकृतिक, सामाजिक,एवं
सांस्कृतिक विशिष्टताक पूर्ण बखान केने छथि ।
ओ मिथिलाकेँ यज्ञ भूमि कहैत छथि-
"सत्य तीरहूति यज्ञ-भूमि पुण्य देनिहारि । तीरहुति सन नहि सुन्दर देश ।"
बालकाण्डमे एकठाम मिथिलाक धर्मनिष्ठा ,
शालीनता आ आचार-विचारक प्रशंसा करैत
लिखने छथि-
"दयायुत नर सकल सुन्दर स्वच्छ सभ व्यवहार ।
सभ गुण नियत कनक-रत्नाकर धरणी ।
अतिशय जन सौजन्य देश मुनि-मन रंजन ।"
महाकवि मिथिलाक प्राकृतिक सौन्दर्यक अपूर्व वर्णन केने छथि । विश्वामित्रक संग राम आ लक्षमण धनुष यज्ञ देखबाक लेल मिथिला विदा भेलाह । एतए प्रवेश करितहिँ एतुक्का वातावरण देखि रामक मुख सँ अनायास निम्न पाँति बहराए जाइत छनि-
देखैत मात्र मन लक्ष्मण तृप्त भेलौँ
की दिव्य फूल फल वृक्ष अनन्त धान ।
पक्षी विलक्षण करै अछि रम्य गान ।
कवीश्वरक डीहपर स्थापित मूर्ति।
"न्यायक भवन कचहरी नाम।सभ अन्याय भरल तेहिठाम।
सत्य वचन विरले जन भाष।सभ मन धनक हरन अभिलाष।।
कपट भरल कत कोटिक कोटि।ककर न कर मर्यादा छोटि।
कह कवि 'चन्द्र' कचहरी घूस।सभ सहमत ककरा के दूस।।"



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